"दुखी मोर की कहानी"
मेहनत का फल एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके पास बहुत ही कम जमीन थी और वह दिन-रात मेहनत करता था ताकि अपने परिवार का पेट भर सके। रामू के पास एक पुराना बैल था, जिसे वह बहुत प्यार करता था। वह बैल उसकी खेती का मुख्य साधन था। संघर्ष का आरंभ : एक साल गाँव में भयंकर सूखा पड़ा। फसलें सूख गईं और किसान परेशान हो गए। रामू की स्थिति और भी खराब हो गई। उसका बैल भी बीमार पड़ गया। रामू ने अपनी सारी जमा पूंजी बैल के इलाज में लगा दी, लेकिन बैल ठीक नहीं हो सका और एक दिन वह मर गया।
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