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"दुखी मोर की कहानी"

"दुखी मोर की कहानी"


एक समय की बात है, एक अच्छे और खुशमिजाज मोर जंगल में रहता था। वह हमेशा अपनी खूबसूरत तालियों को फैलाता और अपने रंगीन पंखों को खुद पर गर्व  महसूस करता था। वह अपनी आवाज़ से सभी को हर्षित कर देता और सबके दिलों को आनंदित करता था।


 

एक दिन, उसे जंगल में एक और मोर मिला, जिसका नाम दुखी मोर था। दुखी मोर हमेशा उदास रहता और अपने आप को दूसरों से कमजोर मानता था। वह चाहता था कि उसके पंख भी उसी रंगीनी और खूबसूरती में हो, परंतु उसके पंख हमेशा सामान्य और उदास दिखते थे।


दुखी मोर ने अपने जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास किया, परंतु उसके दि ल में हमेशा एक खोखलापन का अहसास रहता था। उसने अपनी खुद की तुलना दूसरों से हमेशा नकारात्मक तरीके से की और खुद को नीचे दिखाता रहता था।


जंगल के दूसरे मोर ने उसे देखकर उसकी मदद करने का प्रयास किया, परंतु दुखी मोर ने उसे नकारा दिया और उसकी सहायता को ठुकरा दिया।


एक दिन, जंगल में बड़ी बारिश हुई और सभी पंछियों के पंख गीले हो गए। उनके पंख से आवाज़ नहीं आ रही थी और सभी उदास दिख रहे थे। उस वक्त दुखी मोर ने देखा कि उसका दोस्त, जो हमेशा खुश और उत्साहित रहता था, उसके पास आया और उसने उसके पंखों को पकड़ा।


दुखी मोर ने आवाज़ बनाने की कोशिश की, परंतु उसके पंख से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी। उसका दोस्त उसे दिलासा देते हुए बोला, "तुम्हारी आवाज़ तुम्हारे पंखों में नहीं, बल्कि तुम्हारे दिल में है।"


यह सुनकर दुखी मोर की आँखों से आंसू टपक आए। वह समझ गया कि वास्तव में उसकी ख़ूबसूरती और ख़ासियत उसके दिल में है, और वह खुद को पसंद करने लगा। उसने अपनी आवाज़ को फिर से उच्च किया और उसकी खुशियों ने पूरे जंगल को मोहित कर दिया।


इसके बाद से, दुखी मोर ने खुद को स्वीकार कर लिया और उसने जीवन का आनंद उठाना शुरू किया।


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