"ऊपर उठो" - एक प्रेरणादायक कहानी छोटे से गांव के बीचों-बीच एक पुराना बरगद का पेड़ था। उस पेड़ के नीचे बैठा 14 साल का अंशु, स्कूल की किताबें हाथ में लिए गहरी सोच में डूबा था। वह अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहता था, पर उसके सपनों और उसकी स्थिति के बीच एक बड़ी दीवार खड़ी थी। अंशु का परिवार गरीब था। उसके पिता किसान थे और मां घर पर सिलाई का काम करती थी। पढ़ाई के लिए अंशु को रोजाना 5 किलोमीटर चलकर स्कूल जाना पड़ता था। रास्ता कठिन था, लेकिन उसकी लगन उसे कभी पीछे हटने नहीं देती थी। एक दिन स्कूल में मास्टर जी ने कक्षा में एक सवाल पूछा, "आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं?" अंशु ने बिना झिझक कहा, "मैं वैज्ञानिक बनना चाहता हूं।" सारी कक्षा ठहाका लगाकर हंस पड़ी। किसी ने कहा, "अरे, तुम तो खेत जोतने लायक भी नहीं हो। वैज्ञानिक कैसे बनोगे?" मास्टर जी ने भी उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। उस दिन अंशु का मन बहुत उदास था। वह घर लौटते वक्त बार-बार सोचता रहा, "क्या मैं सच में कुछ नहीं कर सकता? क्या मेरी गरीबी मेरे सपनों का अंत है?" मां की प्रेरणा