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An Inspirational Story :-"Stand Up" (एक प्रेरणादायक कहानी :- "ऊपर उठो")

"ऊपर उठो" - एक प्रेरणादायक कहानी छोटे से गांव के बीचों-बीच एक पुराना बरगद का पेड़ था। उस पेड़ के नीचे बैठा 14 साल का अंशु, स्कूल की किताबें हाथ में लिए गहरी सोच में डूबा था। वह अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहता था, पर उसके सपनों और उसकी स्थिति के बीच एक बड़ी दीवार खड़ी थी। अंशु का परिवार गरीब था। उसके पिता किसान थे और मां घर पर सिलाई का काम करती थी। पढ़ाई के लिए अंशु को रोजाना 5 किलोमीटर चलकर स्कूल जाना पड़ता था। रास्ता कठिन था, लेकिन उसकी लगन उसे कभी पीछे हटने नहीं देती थी। एक दिन स्कूल में मास्टर जी ने कक्षा में एक सवाल पूछा, "आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं?" अंशु ने बिना झिझक कहा, "मैं वैज्ञानिक बनना चाहता हूं।" सारी कक्षा ठहाका लगाकर हंस पड़ी। किसी ने कहा, "अरे, तुम तो खेत जोतने लायक भी नहीं हो। वैज्ञानिक कैसे बनोगे?" मास्टर जी ने भी उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। उस दिन अंशु का मन बहुत उदास था। वह घर लौटते वक्त बार-बार सोचता रहा, "क्या मैं सच में कुछ नहीं कर सकता? क्या मेरी गरीबी मेरे सपनों का अंत है?" मां की प्रेरणा

अनमोल दोस्ती (दोस्ती और संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी )

"अनमोल दोस्ती" एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में दो बच्चे रहते थे, रोहित और सूरज। दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे और हमेशा साथ में खेलते थे। उनका दोस्ती का बंधन इतना मजबूत था कि गाँव के लोग उनकी मिसाल देते थे। संघर्ष और संघर्ष का फल एक दिन गाँव में एक मेले का आयोजन हुआ। रोहित और सूरज भी मेले में गए। वहाँ उन्हें एक बड़ा पहाड़ी खेल देखने को मिला। जो भी इस पहाड़ी पर चढ़ाई करेगा और सबसे ऊपर पहुंचेगा, उसे इनाम मिलेगा। रोहित और सूरज ने भी इस खेल में हिस्सा लेने का निश्चय किया।

"जीवन की पाठशाला" ( एक शिक्षक की प्रेरणादायक कहानी )

एक शिक्षक की प्रेरणादायक कहानी "जीवन की पाठशाला"        छोटे से गांव में बसे एक स्कूल में, एक शिक्षक थे जिनका नाम श्री शास्त्री था। वह साधारण जीवन जीते थे, लेकिन उनकी शिक्षा देने की शैली और उनका दृष्टिकोण असाधारण था। शास्त्री जी का मानना था कि हर बच्चा अपने अंदर अद्भुत क्षमता लेकर आता है। उनका उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं था, बल्कि वह अपने छात्रों को जीवन जीने की कला सिखाना चाहते थे। नया छात्र: अर्जुन       एक दिन, स्कूल में एक नया छात्र दाखिला लेने आया। उसका नाम अर्जुन था। अर्जुन का नाम तो महाकाव्यों के वीर योद्धा से प्रेरित था, लेकिन उसका स्वभाव बिल्कुल विपरीत था। वह गुमसुम और आत्मविश्वासहीन रहता था। गांव में उसके परिवार को लेकर कई तरह की बातें होती थीं। उसके माता-पिता किसान थे, लेकिन गरीबी और कर्ज के कारण वह शिक्षा के प्रति अर्जुन को प्रेरित नहीं कर पाते थे।       अर्जुन अक्सर क्लास में पीछे की बेंच पर बैठा रहता और चुपचाप दीवार को घूरता रहता। उसकी किताबें धूल से ढकी रहतीं, और उसकी आंखों में एक अजीब-सी उदासी छाई रहती। कई शिक्षक ...

एक छोटी सी लड़की और उसका सपना ( सपने और संघर्ष )

एक छोटी सी लड़की और उसका सपना किसी गाँव में, नंदिनी नाम की एक दस वर्षीय लड़की रहती थी। वह बेहद मासूम और खुशमिजाज थी, लेकिन उसकी एक आँख कमजोर थी। उसकी इस कमजोरी के कारण गाँव के बच्चे उसे चिढ़ाते थे और "काना" कहकर बुलाते थे। नंदिनी यह सब सहती, लेकिन भीतर ही भीतर उसे बहुत दुःख होता। उसके पिता एक गरीब किसान थे। माँ घर संभालती थी, और नंदिनी अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। परिवार के पास ज्यादा साधन नहीं थे, लेकिन नंदिनी के दिल में एक बड़ा सपना था। वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना चाहती थी ताकि वह उन बच्चों की मदद कर सके, जिन्हें उसकी तरह कमजोरी या बीमारी के कारण ताने सहने पड़ते हैं। चुनौतियों का सामना नंदिनी का स्कूल गाँव के पास ही था। स्कूल में पढ़ाई का स्तर बहुत साधारण था, और गाँव के बच्चे पढ़ाई से ज्यादा खेल-कूद में रुचि रखते थे। लेकिन नंदिनी अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर थी। उसे पता था कि डॉक्टर बनने के लिए मेहनत करनी होगी। हर दिन स्कूल से लौटने के बाद, वह अपने पिता के खेत में काम में हाथ बंटाती। माँ से खाना बनाना सीखती, और रात को दीये की हल्की रोशनी में किताबें पढ़ती। कई बार वह ...

एक भिखारी

कहानियां नई नई सीख देती है, बच्चो में अगर अच्छे अच्छे संस्कार सींचने हो तो कहानियां सबसे अच्छा जरिया बन सकती है। आज की कहानी आपको थोड़ा भावुक कर सकती है क्योंकि आज आप एक Emotional kahani आपके साथ साझा कर रहा हूं, हां इमोशनल करने के साथ एक बहुमूल्य बोध भी आप इस कहानी से सीख सकते है इसलिए इसे पूरी जरूर पढ़िएगा।  "एक भिखारी "         हर दिन एक भिखारी दरवाजे के पास आकर भीख मांगता था। और घर का मालिक हमेशा घर के बाहर आते ही उसे देख कर फिर जाया करता कई बार उसके लिए गालियां भी बकता। वो कहता तू जिंदा ही क्यों है? पूरी जिंदगी ऐसे ही भीख मांगेगा क्या? धरती का बोझ क्यों बना बैठा है! और कभी-कभी उस भिखारी को गुस्से में वह धक्का भी मार दिया करता। इतना कुछ हो जाने के बावजूद अधिकारी के मुंह से सिर्फ यही निकलता कि भगवान भगवान तुम्हारे पापों को माफ करे! एक बार सेठ को धंधे में बड़ा नुकसान होने की खबर मिली। सेठ बहुत परेशान था कि तभी उसके दरवाजे पर वही भिखारी आया! गुस्से में अपना आपा खोते हुए सेठ ने उस भिखारी को पत्थर दे मारा! पत्थर लगने के कारण भिखारी का सर फूट गया और उसके सर से...

एक बिजनेसमैन और एक नाविक की कहानी | | A Short Motivational Story In Hindi For Success

एक बिजनेसमैन और एक नाविक की कहानी | | A Short Motivational Story In Hindi For Success         एक बार एक Businessman था। वह एक फैक्ट्री खोलना चाहता था और फैक्ट्री के लिए जमीन देखने वह एक गांव की ओर जा रहा था। गांव में पहुंचने से पहले एक नदी आई, उसे उस नदी को पार करना था। नदी को पार करने के लिए उसके पास दो विकल्प थे। या तो वह अपनी कार से बहुत बड़ा चक्कर लगाकर दूसरे रास्ते से उस गांव में पहुंचता, या फिर उस नदी में जो नाव चलती थी उस नाव में सवार होकर और नदी को पार करके वह गांव में पहुंच पाता।          उसने दूसरा विकल्प चुना क्योंकि इससे उसका बहुत सारा समय भी बचने वाला था। उसने नाव वाले से नदी पार कराने को कहा और नाव में सवार हो गया। जब नाव बीच नदी में थी तो वह उस नाविक से कुछ सवाल करने लगा। उसने पूछा- क्या तुम मुझे जानते हो। नाविक ने कहा- नहीं साहब। इस पर Businessman बड़ा हैरान हुआ। उसने कहा- क्या तुम मुझे नहीं जानते हो। मेरी फोटो तो आए दिन अखबारों में छपती रहती है। मैं इस देश का बहुत बड़ा Businessman हूँ। क्या तुम अखबार नहीं पढ़ते।

रोशनी का गुब्बारा (Motivational Story in hindi)

       रोशनी का गुब्बारा         एक छोटी सी लड़की थी उसे अंधेरे से बहुत डर लगता था। वह हर रात रोती थी और अपने माता-पिता से कहती थी कि मुझे अंधेरे से बहुत डर लगता है। उसके माता-पिता ने उसे समझाया कि अंधेरे से कुछ नहीं होता तुम्हे नही डरना चाहिए, लेकिन वह नहीं मानी।                    एक दिन, लड़की की माँ ने उसे एक कहानी सुनाई। कहानी में एक नन्ही सी परी थी जो अंधेरे से बहुत डरती थी। परी ने अपने डर को दूर करने के लिए एक रोशनी का गुब्बारा बनाया। वह गुब्बारे को अपने साथ ले जाती थी और जब भी वह अंधेरे से डरती थी, तो वह गुब्बारे को जलाकर रोशनी करती थी।

मैं कर सकता हूँ( Short Motivational Story in Hindi )

मैं कर सकता हूँ               एक बार की बात है, एक छोटा सा इंजन था , जिसे एक पहाड़ी पर मालवाहक कारों की एक लंबी कतार को खींचने का काम सौंपा गया था। अन्य बड़े इंजनों ने छोटे इंजन पर हँसते हुए कहा कि तुम बहुत छोटे और कमजोर हो , तुम ये कभी नही कर सकते हो । लेकिन छोटा इंजन दृढ़ निश्चयी था।            इसने मालवाहक कारों को एक समय में एक कार, पहाड़ पर खींचना शुरू कर दिया। यह धीमी गति से चल रहा था, और चढ़ते समय छोटा इंजन फुँफकारने लगा । लेकिन इसने कभी हार नहीं मानी । “मुझे लगता है की मैं कर सकता हूँ,” छोटे इंजन ने मन ही मन कह रहा था “मुझे लगता है मैं कर सकता हूँ।” अन्य बड़े इंजन हँसते रहे, लेकिन छोटा इंजन चलता रहा । वह ऊँचे और ऊँचे चढ़ता गया, जब तक कि वह पहाड़ की चोटी पर नहीं पहुँच गया। अन्य इंजन ये देखकर हैरान रह गये । उन्होंने ऐसा कुछ कभी नहीं देखा था। “आपने ऐसा कैसे किया ?” बड़े इंजनो ने पूछा छोटे इंजन ने कहा। “मैं सोचता रहा, ‘मुझे लगता है मैं कर सकता हूँ, मुझे खुद पर पूरा विश्वास था की मे कर लूंगा । यदि आप खुद पर...

चिड़िया और आदमी की कहानी(Motivational Story in hindi )

चिड़िया और आदमी की कहानी                     एक चिड़िया रोज अपना घोंसला बनाने के लिए तिनके इकट्ठा करती थी और वह शैतान आदमी रोज उस चिड़िया का घोंसला तोड़ देता था। ऐसा कई महीनों तक चलता रहा परंतु चिड़िया ने घोंसला बनाना बंद नहीं किया लेकिन उस शैतान आदमी ने आखिर थक हार कर चिड़िया का घोंसला तोड़ना बंद कर दिया और फिर कुछ ही दिनों में चिड़िया ने अपने घोसलें में अंडे दिए। जिनमें से प्यारे-प्यारे चिड़िया के बच्चे बाहर आए।             उन नन्हें-नन्हें प्यारे बच्चों को देखकर वह आदमी भी बहुत खुश हुआ, उनकी देखभाल करने लगा, उनके लिए दाने डालने लगा। एक दिन उसने चिड़िया से पूछा कि मैं तो तुम्हारा घोंसला रोज तोड़ देता था परंतु तुमने अपना काम करना बंद क्यों नहीं किया, तो चिडिया ने कहा कि भैया आप अपना काम कर रहे थे और मैं अपना। MORAL OF THE STORY :                      इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि यदि सफलताओं या परेशानियों से हताश होकर हम अपना काम करने की आदत ...

अभ्यास की शक्ति (Motivational Story in hindi )

अभ्यास की शक्ति अभ्यास का महत्त्व प्राचीन समय में विद्यार्थी गुरुकुल में रहकर ही पढ़ा करते थे।. बच्चे को शिक्षा ग्रहण करने के लिए गुरुकुल में भेजा जाता था। बच्चे गुरुकुल में गुरु के सानिध्य में आश्रम की देखभाल किया करते थे. और अध्ययन भी किया करते थे। वरदराज को भी सभी की तरह गुरुकुल भेज दिया गया। वहां आश्रम में अपने साथियों के साथ घुलने मिलने लगा। लेकिन वह पढ़ने में बहुत ही कमजोर था। गुरुजी की कोई भी बात उसके बहुत कम समझ में आती थी। इस कारण सभी के बीच वह उपहास का कारण बनता है। उसके सारे साथी अगली कक्षा में चले गए लेकिन वो आगे नहीं बढ़ पाया। गुरुजी जी ने भी आखिर हार मानकर उसे बोला, “बेटा वरदराज! मैने सारे प्रयास करके देख लिये है। अब यही उचित होगा कि तुम यहां अपना समय बर्बाद मत करो। अपने घर चले जाओ और घरवालों की काम में मदद करो।”

सफलता का रहस्य - "सुकरात" (Motivational Story in hindi )

सफलता का रहस्य - "सुकरात" एक बार एक व्यक्ति ने महान Philosopher सुकरात से पूछा कि “सफलता का रहस्य क्या है?” – What is the secret of success? सुकरात ने उस इंसान को कहा कि वह कल सुबह नदी के पास मिले, वही पर उसे अपने प्रश्न का जवाब मिलेगा। जब दूसरे दिन सुबह वह व्यक्ति नदी के पास मिला तो सुकरात ने उसको नदी में उतरकर, नदी गहराई की गहराई मापने के लिए कहा।

farmer's determination किसान का दृढ़ निश्चय (Motivational Story in hindi )

  किसान का दृढ़ निश्चय एक चिड़िया ने अपने बच्चों के साथ जा खेत में एक बहुत ही सुंदर घोसला बनाया हुआ था। जब खेत में फसल अच्छी तरह से पक गई। तब किसान उस खेत पर गया और बोला” कल पड़ोसियों को बुलाकर फसल काटने के लिए कहूंगा” चिड़िया के बच्चों ने सुना तो पूरी तरह से डर गए और सहम गए। चिड़िया बोली,”बिल्कुल भी घबराओ मत” हम पूरी तरह से सुरक्षित है, किसान कल फसल काटने नहीं आएगा। अगले दिन किसान पड़ोसियों के ना पहुंचने पर यह कहते हुए चला गया की अगले दिन मैं अपने रिश्तेदारों को लेकर आऊंगा फसल काटने। चिड़िया के बच्चे पूरी तरह से डर गए।

Motivational Short Story In Hindi : एक व्यक्ति कभी नहीं हार सकता

Motivational Short Story In Hindi: एक  व्यक्ति कभी नहीं हार सकता Short Inspirational Story In Hindi  बहुत पुरानी बात है एक जंगल में एक गुरुकुल था जिसमे बहुत सारे बच्चे पढ़ने आते थे एक बात की बात है गुरु जी सभी विद्यार्थीओ को पढ़ा रहे थे मगर एक विद्यार्थी ऐसा था जिसे बार-बार समझाने पर भी समझ में नहीं आ रहा था। गुरु जी को बहुत तेज़ से गुस्सा आया और उन्होंने उस विद्यार्थी से कहा जरा अपनी हथेली तो दिखाओ बेटा। विद्यार्थी ने हथेली गुरु जी के आगे कर दी हथेली देखकर गुरु जी बोले बेटा तुम घर चले जाओ आश्रम में रहकर अपना समय व्यर्थ मत करो तुम्हारे भाग्य में विद्या नहीं है। शिष्य ने पूछा क्यों गुरु जी? गुरु जी ने कहा तुम्हारे हाथ में विद्या की रेखा नहीं है। गुरु जी ने एक हुसियार विद्यार्थी की हथेली उसे दिखाते हुए कहा यह देखो ये है विद्या की रेखा यह तुम्हारे हाथ में नहीं है इसलिए तुम समय नस्ट ना करो और घर चले जाओ और वहा अपना कोई और काम देखो।

"दुखी मोर की कहानी"

"दुखी मोर की कहा  नी" एक समय की बात है, एक अच्छे और खुशमिजाज मोर जंगल में रहता था। वह हमेशा अपनी खूबसूरत तालियों को फैलाता और अपने रंगीन पंखों को खुद पर गर्व   महसूस करता था। वह अपनी आवाज़ से सभी को हर्षित कर देता और सबके दिलों को आनंदित करता था।  

क्रोध और नियंत्रण

  एक समय की बात है। एक राजा घने जंगल में भटक गया। कई घंटों के बाद वह प्यास से व्याकुल होने लगा। तभी उसकी नजर एक वृक्ष पर पड़ी जहां एक डाली से टप-टप करती पानी की छोटी-छोटी बूंदें गिर रही थीं। राजा ने पत्तों का दोना बनाकर पानी इकट्ठा किया, राजा जैसे ही पानी पीने लगा एक तोता आया और झपट्टा मार दोने को गिरा दिया। राजा ने सोचा पंछी को प्यास लगी होगी इसलिए वह भी पानी पीना चाहता था लेकिन गलती से उसने झपट्टा मारकर पानी को गिरा दिया। यह सोचकर राजा फिर से खाली दोने को भरने लगा, काफी देर के बाद वह दोना फिर भर गया। राजा ने हर्षचित्त होकर जैसे ही दोने को उठाया तो तोते ने वापस उसे गिरा दिया। राजा को बहुत तेज गुस्सा आया और उसने चाबुक उठाकर तोते पर वार किया और उसके प्राण निकल गए।

मंदबुद्धि बालक

  विद्यालय में सब उसे मंदबुद्धि कहते थे। उसके गुरुजन भी उससे नाराज रहते थे क्योंकि वह पढ़ने में बहुत कमजोर था और उसकी बुद्धि का स्तर औसत से भी कम था। कक्षा में उसका प्रदर्शन हमेशा ही खराब रहता था। और बच्चे उसका मजाक उड़ाने से कभी नहीं चूकते थे। पढने जाना तो मानो एक सजा के समान हो गया था, वह जैसे ही कक्षा में घुसता और बच्चे उस पर हंसने लगते, कोई उसे महामूर्ख तो कोई उसे बैलों का राजा कहता, यहाँ तक की कुछ अध्यापक भी उसका मजाक उड़ाने से बाज नहीं आते। इन सबसे परेशान होकर उसने स्कूल जाना ही छोड़ दिया।अब वह दिन भर इधर-उधर भटकता और अपना समय बर्बाद करता। एक दिन इसी तरह कहीं से जा रहा था , घूमते-घूमते उसे प्यास लग गयी। वह इधर-उधर पानी खोजने लगा। अंत में उसे एक कुआं दिखाई दिया। वह वहां गया और कुएं से पानी खींच कर अपनी प्यास बुझाई। अब वह काफी थक चुका था, इसलिए पानी पीने के बाद वहीं बैठ गया।

गुरु की शिक्षा

 गुरु की शिक्षा  गुरु रामस्वरूप अपने शिष्यों के साथ आश्रम के लिए भिक्षाटन पर निकले थे। वह अपने गुरुकुल में भोजन की व्यवस्था भिक्षा मांग कर ही किया करते थे।जब वह एक कस्बे से दूसरे कस्बे की ओर जा रहे थे, रास्ते में खेत-बधार मिलने लगे। किसी खेत में हरी-भरी फसल खड़ी तो कोई खेत बंजर नजर आ रहा था। ऐसे ही एक बंजर खेत पर किसान कुछ बुवाई करने के लिए खेत को जोत रहा था। वहीं पेड़ के नीचे उसने अपना सारा सामान, पोटली आदि रखा हुआ था। गुरु रामस्वरूप के शिष्यों में एक शिष्य शरारती था, वह शरारती स्वभाव के कारण किसान की रखी हुई पोटली उठा लाया।गुरु रामस्वरूप को जब ज्ञात हुआ कि उसके शिष्य ने कुछ शरारत किया है। गुरु ने शिष्य को समझाया –  ‘पुत्र इस प्रकार तुम उस गरीब किसान की पोटली चुरा कर उसे कष्ट दे रहे हो! यह कार्य तुम्हें शोभा नहीं देता। तुम उस किसान को दुखी करके अपने ईश्वर को दुखी करोगे। तुम्हें जो पैसे भिक्षा में मिले हैं उसे ले जाकर उसी स्थान पर पोटली सहित रख दो और फिर किसान का भाव देखो।’ शिष्य ने ऐसा ही किया -वह पोटली और पोटली के नीचे भिक्षा में मिले हुए पैसे रख आता है। गरीब किसान काफी...

भगवान की योजना

 एक आदमी मंदिर में सेवक था. उसका काम मंदिर की साफ-सफ़ाई करना था. भक्तों और श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में से थोड़ा-बहुत उसे मंदिर के पुजारी द्वारा दे दिया जाता. इसी से उसकी गुजर-बसर चल रही थी. वह अपनी जिंदगी से बहुत परेशान और दु:खी था. मंदिर में काम करते-करते वह दिन भर अपनी ज़िंदगी को लेकर शिकायतें करता रहता. एक दिन शिकायत करते हुये वह भगवान से बोला, “भगवान जी! आपकी ज़िंदगी कितनी आसान है. आपको बस एक जगह आराम से खड़े रहना होता है. मेरी ज़िंदगी को देखो. कितनी कठिन ज़िंदगी जी रहा हूँ मैं. दिन भर कड़ी मेहनत करता हूँ, तब कहीं दो जून की रोटी नसीब हो पाती है. काश मेरी ज़िंदगी भी आपकी तरह होती.” उसकी बात सुनकर भगवान (God) बोले, “तुम जैसा सोच रहे हो, वैसा नहीं है. मेरी जगह रहना बिल्कुल आसान नहीं है. मुझे बहुत सारी चीज़ें देखनी पड़ती है. बहुत सी व्यवस्थायें करनी पड़ती है. ये हर किसी के बस की बात नहीं है.” “भगवान जी! कैसी बात कर रहे हैं आप? आपका काम आसान ही तो है. आपकी तरह तो मैं भी दिन भर खड़े रह सकता हूँ. इसमें कौन सी बड़ी बात है?” मंदिर का सेवक बोला. “तुम नहीं कर पाओगे. इस काम में बहुत धैर्य की आवश्य...

Google and Microsoft square off over online privacy concerns

Last week, users of Apple's Safari browser accused Google of violating their privacy to place "tracking cookies." Now Microsoft says Google is circumventing privacy features in the Internet Explorer browser, too. Google spent much of last week dodging criticism from Apple users about its online privacy practices. But when Microsoft got involved this week, that's when things got really interesting. Users of Apple's Safari browser recently claimed that Google was violating their privacy by circumventing a mechanism the browser uses to disable tracking. Here's what's (apparently) going on under the hood: by default, Safari disables third-party cookies, nuggets of code that companies can use to identify users returning to a site they've visited before, or to track what other sites they visit. Safari can accept cookies if a user explicitly gives permission, but Google's ad platform reportedly used a workaround to mimic approval of its cookies. RECOMME...