"अनमोल दोस्ती"
एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में दो बच्चे रहते थे, रोहित और सूरज। दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे और हमेशा साथ में खेलते थे। उनका दोस्ती का बंधन इतना मजबूत था कि गाँव के लोग उनकी मिसाल देते थे।
संघर्ष और संघर्ष का फल
एक दिन गाँव में एक मेले का आयोजन हुआ। रोहित और सूरज भी मेले में गए। वहाँ उन्हें एक बड़ा पहाड़ी खेल देखने को मिला। जो भी इस पहाड़ी पर चढ़ाई करेगा और सबसे ऊपर पहुंचेगा, उसे इनाम मिलेगा। रोहित और सूरज ने भी इस खेल में हिस्सा लेने का निश्चय किया।
पहाड़ी बहुत ही कठिन थी और बीच में चढ़ते-चढ़ते रोहित को चोट लग गई। वह गिर गया और चिल्लाने लगा। सूरज ने अपने दोस्त की चीख सुनी और तुरंत वापस आकर उसकी मदद की। रोहित ने कहा, "तुम जाओ, इनाम जीत लो। मैं ठीक हो जाऊँगा।" लेकिन सूरज ने अपने दोस्त को अकेला नहीं छोड़ा और उसकी चोट पर पट्टी बांधी। फिर उन्होंने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर धीरे-धीरे पहाड़ी पर चढ़ाई की।
दोस्ती का सच्चा अर्थ
दोनों ने बहुत मेहनत की और आखिरकार पहाड़ी के शीर्ष पर पहुँच गए। वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि उनका इनाम उनकी दोस्ती का सबक था। मेले के आयोजकों ने कहा, "इस पहाड़ी का असली इनाम दोस्ती और संघर्ष का सबक है। तुम दोनों ने मिलकर यह साबित कर दिया कि सच्चे दोस्त वही होते हैं जो कठिन समय में एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते।"
नैतिक शिक्षा
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चे दोस्त हमेशा एक-दूसरे का साथ देते हैं, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों। दोस्ती का असली अर्थ एक-दूसरे की मदद करना और मुश्किल समय में साथ रहना है।
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