दिल को छू लेने वाली कहानी:
माँ का प्यार
यह कहानी एक छोटे से गाँव में रहने वाले रमेश और उसकी माँ की है। रमेश की माँ का नाम सरस्वती था और वे बहुत ही मेहनती और समर्पित महिला थीं। रमेश के पिता का स्वर्गवास हो चुका था, जब वह बहुत छोटा था। सरस्वती ने अकेले ही रमेश को पाला और पढ़ाया-लिखाया।
सरस्वती गाँव में छोटे-मोटे काम करके अपने बेटे को शिक्षा दिला रही थीं। वह चाहती थीं कि रमेश एक दिन बड़ा आदमी बने और अपने जीवन में सफल हो। रमेश भी अपनी माँ की मेहनत और त्याग को देखकर पढ़ाई में बहुत मन लगाता था।
एक दिन रमेश की कॉलेज की फीस भरने के लिए सरस्वती के पास पैसे नहीं थे। उन्होंने अपने गहने बेचकर रमेश की फीस भरी। रमेश को यह बात पता चली तो उसने मन ही मन ठान लिया कि वह बहुत मेहनत करेगा और अपनी माँ का सपना पूरा करेगा।
वक्त बीतता गया, रमेश ने पढ़ाई पूरी की और एक बड़ी कंपनी में नौकरी पाने में सफल रहा। उसकी तनख्वाह भी अच्छी थी। उसने अपने गाँव लौटकर अपनी माँ को अपने साथ शहर ले जाने का प्रस्ताव रखा, ताकि वे आराम से रह सकें। लेकिन सरस्वती ने इंकार कर दिया। वह अपने गाँव और लोगों से बहुत जुड़ी हुई थीं।
रमेश ने अपनी माँ के लिए गाँव में ही एक सुंदर सा घर बनवाया और उनकी देखभाल के लिए सभी सुविधाएं मुहैया करवाईं। वह हर महीने अपनी माँ से मिलने आता और अपनी माँ के साथ समय बिताता। सरस्वती बहुत खुश थीं कि उनका बेटा इतना सफल हो गया है और उनके लिए इतना कुछ कर रहा है।
एक दिन रमेश ने अपनी माँ से पूछा, "माँ, आपने इतना त्याग किया, इतनी मेहनत की। आपको कभी कठिनाईयों का सामना करने से डर नहीं लगा?"
सरस्वती ने मुस्कुराते हुए कहा, "बेटा, माँ का प्यार सबसे बड़ा होता है। जब माँ अपने बच्चे के लिए कुछ करती है, तो उसे कोई कठिनाई महसूस नहीं होती। मेरा सपना था कि तुम सफल बनो, और आज तुमने मेरा सपना पूरा कर दिया है। इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है?"
रमेश की आँखों में आँसू आ गए। उसने अपनी माँ को गले लगाया और कहा, "माँ, आप सबसे महान हो। आपके बिना मैं कुछ भी नहीं कर पाता।"
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि माँ का प्यार और त्याग सबसे बड़ा होता है। माँ अपने बच्चों के लिए कुछ भी कर सकती है और उनकी सफलता में ही अपनी खुशी ढूंढती है। रमेश और सरस्वती की यह कहानी दिल को छू लेने वाली है और हमें अपने माता-पिता के महत्व को समझने की प्रेरणा देती है।

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