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"जीवन की पाठशाला" ( एक शिक्षक की प्रेरणादायक कहानी )

एक शिक्षक की प्रेरणादायक कहानी "जीवन की पाठशाला"        छोटे से गांव में बसे एक स्कूल में, एक शिक्षक थे जिनका नाम श्री शास्त्री था। वह साधारण जीवन जीते थे, लेकिन उनकी शिक्षा देने की शैली और उनका दृष्टिकोण असाधारण था। शास्त्री जी का मानना था कि हर बच्चा अपने अंदर अद्भुत क्षमता लेकर आता है। उनका उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं था, बल्कि वह अपने छात्रों को जीवन जीने की कला सिखाना चाहते थे। नया छात्र: अर्जुन       एक दिन, स्कूल में एक नया छात्र दाखिला लेने आया। उसका नाम अर्जुन था। अर्जुन का नाम तो महाकाव्यों के वीर योद्धा से प्रेरित था, लेकिन उसका स्वभाव बिल्कुल विपरीत था। वह गुमसुम और आत्मविश्वासहीन रहता था। गांव में उसके परिवार को लेकर कई तरह की बातें होती थीं। उसके माता-पिता किसान थे, लेकिन गरीबी और कर्ज के कारण वह शिक्षा के प्रति अर्जुन को प्रेरित नहीं कर पाते थे।       अर्जुन अक्सर क्लास में पीछे की बेंच पर बैठा रहता और चुपचाप दीवार को घूरता रहता। उसकी किताबें धूल से ढकी रहतीं, और उसकी आंखों में एक अजीब-सी उदासी छाई रहती। कई शिक्षक ...

एक छोटी सी लड़की और उसका सपना ( सपने और संघर्ष )

एक छोटी सी लड़की और उसका सपना किसी गाँव में, नंदिनी नाम की एक दस वर्षीय लड़की रहती थी। वह बेहद मासूम और खुशमिजाज थी, लेकिन उसकी एक आँख कमजोर थी। उसकी इस कमजोरी के कारण गाँव के बच्चे उसे चिढ़ाते थे और "काना" कहकर बुलाते थे। नंदिनी यह सब सहती, लेकिन भीतर ही भीतर उसे बहुत दुःख होता। उसके पिता एक गरीब किसान थे। माँ घर संभालती थी, और नंदिनी अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। परिवार के पास ज्यादा साधन नहीं थे, लेकिन नंदिनी के दिल में एक बड़ा सपना था। वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना चाहती थी ताकि वह उन बच्चों की मदद कर सके, जिन्हें उसकी तरह कमजोरी या बीमारी के कारण ताने सहने पड़ते हैं। चुनौतियों का सामना नंदिनी का स्कूल गाँव के पास ही था। स्कूल में पढ़ाई का स्तर बहुत साधारण था, और गाँव के बच्चे पढ़ाई से ज्यादा खेल-कूद में रुचि रखते थे। लेकिन नंदिनी अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर थी। उसे पता था कि डॉक्टर बनने के लिए मेहनत करनी होगी। हर दिन स्कूल से लौटने के बाद, वह अपने पिता के खेत में काम में हाथ बंटाती। माँ से खाना बनाना सीखती, और रात को दीये की हल्की रोशनी में किताबें पढ़ती। कई बार वह ...

एक भिखारी

कहानियां नई नई सीख देती है, बच्चो में अगर अच्छे अच्छे संस्कार सींचने हो तो कहानियां सबसे अच्छा जरिया बन सकती है। आज की कहानी आपको थोड़ा भावुक कर सकती है क्योंकि आज आप एक Emotional kahani आपके साथ साझा कर रहा हूं, हां इमोशनल करने के साथ एक बहुमूल्य बोध भी आप इस कहानी से सीख सकते है इसलिए इसे पूरी जरूर पढ़िएगा।  "एक भिखारी "         हर दिन एक भिखारी दरवाजे के पास आकर भीख मांगता था। और घर का मालिक हमेशा घर के बाहर आते ही उसे देख कर फिर जाया करता कई बार उसके लिए गालियां भी बकता। वो कहता तू जिंदा ही क्यों है? पूरी जिंदगी ऐसे ही भीख मांगेगा क्या? धरती का बोझ क्यों बना बैठा है! और कभी-कभी उस भिखारी को गुस्से में वह धक्का भी मार दिया करता। इतना कुछ हो जाने के बावजूद अधिकारी के मुंह से सिर्फ यही निकलता कि भगवान भगवान तुम्हारे पापों को माफ करे! एक बार सेठ को धंधे में बड़ा नुकसान होने की खबर मिली। सेठ बहुत परेशान था कि तभी उसके दरवाजे पर वही भिखारी आया! गुस्से में अपना आपा खोते हुए सेठ ने उस भिखारी को पत्थर दे मारा! पत्थर लगने के कारण भिखारी का सर फूट गया और उसके सर से...

एक बिजनेसमैन और एक नाविक की कहानी | | A Short Motivational Story In Hindi For Success

एक बिजनेसमैन और एक नाविक की कहानी | | A Short Motivational Story In Hindi For Success         एक बार एक Businessman था। वह एक फैक्ट्री खोलना चाहता था और फैक्ट्री के लिए जमीन देखने वह एक गांव की ओर जा रहा था। गांव में पहुंचने से पहले एक नदी आई, उसे उस नदी को पार करना था। नदी को पार करने के लिए उसके पास दो विकल्प थे। या तो वह अपनी कार से बहुत बड़ा चक्कर लगाकर दूसरे रास्ते से उस गांव में पहुंचता, या फिर उस नदी में जो नाव चलती थी उस नाव में सवार होकर और नदी को पार करके वह गांव में पहुंच पाता।          उसने दूसरा विकल्प चुना क्योंकि इससे उसका बहुत सारा समय भी बचने वाला था। उसने नाव वाले से नदी पार कराने को कहा और नाव में सवार हो गया। जब नाव बीच नदी में थी तो वह उस नाविक से कुछ सवाल करने लगा। उसने पूछा- क्या तुम मुझे जानते हो। नाविक ने कहा- नहीं साहब। इस पर Businessman बड़ा हैरान हुआ। उसने कहा- क्या तुम मुझे नहीं जानते हो। मेरी फोटो तो आए दिन अखबारों में छपती रहती है। मैं इस देश का बहुत बड़ा Businessman हूँ। क्या तुम अखबार नहीं पढ़ते।

रोशनी का गुब्बारा (Motivational Story in hindi)

       रोशनी का गुब्बारा         एक छोटी सी लड़की थी उसे अंधेरे से बहुत डर लगता था। वह हर रात रोती थी और अपने माता-पिता से कहती थी कि मुझे अंधेरे से बहुत डर लगता है। उसके माता-पिता ने उसे समझाया कि अंधेरे से कुछ नहीं होता तुम्हे नही डरना चाहिए, लेकिन वह नहीं मानी।                    एक दिन, लड़की की माँ ने उसे एक कहानी सुनाई। कहानी में एक नन्ही सी परी थी जो अंधेरे से बहुत डरती थी। परी ने अपने डर को दूर करने के लिए एक रोशनी का गुब्बारा बनाया। वह गुब्बारे को अपने साथ ले जाती थी और जब भी वह अंधेरे से डरती थी, तो वह गुब्बारे को जलाकर रोशनी करती थी।

मैं कर सकता हूँ( Short Motivational Story in Hindi )

मैं कर सकता हूँ               एक बार की बात है, एक छोटा सा इंजन था , जिसे एक पहाड़ी पर मालवाहक कारों की एक लंबी कतार को खींचने का काम सौंपा गया था। अन्य बड़े इंजनों ने छोटे इंजन पर हँसते हुए कहा कि तुम बहुत छोटे और कमजोर हो , तुम ये कभी नही कर सकते हो । लेकिन छोटा इंजन दृढ़ निश्चयी था।            इसने मालवाहक कारों को एक समय में एक कार, पहाड़ पर खींचना शुरू कर दिया। यह धीमी गति से चल रहा था, और चढ़ते समय छोटा इंजन फुँफकारने लगा । लेकिन इसने कभी हार नहीं मानी । “मुझे लगता है की मैं कर सकता हूँ,” छोटे इंजन ने मन ही मन कह रहा था “मुझे लगता है मैं कर सकता हूँ।” अन्य बड़े इंजन हँसते रहे, लेकिन छोटा इंजन चलता रहा । वह ऊँचे और ऊँचे चढ़ता गया, जब तक कि वह पहाड़ की चोटी पर नहीं पहुँच गया। अन्य इंजन ये देखकर हैरान रह गये । उन्होंने ऐसा कुछ कभी नहीं देखा था। “आपने ऐसा कैसे किया ?” बड़े इंजनो ने पूछा छोटे इंजन ने कहा। “मैं सोचता रहा, ‘मुझे लगता है मैं कर सकता हूँ, मुझे खुद पर पूरा विश्वास था की मे कर लूंगा । यदि आप खुद पर...