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Showing posts with the label i Success Story in hindi Life Success inspirational story motivational story short story

rajkumar aur jadui jheel / राजकुमार और जादुई झील

राजकुमार और जादुई झील बहुत समय पहले की बात है, एक राज्य था जिसका नाम सुरमाल था। वहाँ का राजा, राजा वीरेंद्र, अपने प्रजाजनों के लिए बहुत प्रिय था। राजा के तीन बेटे थे—राजकुमार आदित्य, राजकुमार आर्यन, और सबसे छोटा, राजकुमार ईशान। राजा वीरेंद्र हमेशा अपने बेटों को सिखाते थे कि सच्चा राजा वही होता है, जो अपने प्रजा की भलाई के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर कर दे। एक दिन राजा ने अपने तीनों बेटों को बुलाया और कहा, “हमारे राज्य में जल संकट बढ़ रहा है। नदी और तालाब सूख रहे हैं। हमें इस समस्या का समाधान खोजना होगा। जो राजकुमार इस समस्या का समाधान करेगा, वही अगला राजा बनेगा।” राजकुमारों ने इस चुनौती को स्वीकार किया और अगले दिन यात्रा पर निकल पड़े।

"जीवन की पाठशाला" ( एक शिक्षक की प्रेरणादायक कहानी )

एक शिक्षक की प्रेरणादायक कहानी "जीवन की पाठशाला"        छोटे से गांव में बसे एक स्कूल में, एक शिक्षक थे जिनका नाम श्री शास्त्री था। वह साधारण जीवन जीते थे, लेकिन उनकी शिक्षा देने की शैली और उनका दृष्टिकोण असाधारण था। शास्त्री जी का मानना था कि हर बच्चा अपने अंदर अद्भुत क्षमता लेकर आता है। उनका उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं था, बल्कि वह अपने छात्रों को जीवन जीने की कला सिखाना चाहते थे। नया छात्र: अर्जुन       एक दिन, स्कूल में एक नया छात्र दाखिला लेने आया। उसका नाम अर्जुन था। अर्जुन का नाम तो महाकाव्यों के वीर योद्धा से प्रेरित था, लेकिन उसका स्वभाव बिल्कुल विपरीत था। वह गुमसुम और आत्मविश्वासहीन रहता था। गांव में उसके परिवार को लेकर कई तरह की बातें होती थीं। उसके माता-पिता किसान थे, लेकिन गरीबी और कर्ज के कारण वह शिक्षा के प्रति अर्जुन को प्रेरित नहीं कर पाते थे।       अर्जुन अक्सर क्लास में पीछे की बेंच पर बैठा रहता और चुपचाप दीवार को घूरता रहता। उसकी किताबें धूल से ढकी रहतीं, और उसकी आंखों में एक अजीब-सी उदासी छाई रहती। कई शिक्षक ...

एक छोटी सी लड़की और उसका सपना ( सपने और संघर्ष )

एक छोटी सी लड़की और उसका सपना किसी गाँव में, नंदिनी नाम की एक दस वर्षीय लड़की रहती थी। वह बेहद मासूम और खुशमिजाज थी, लेकिन उसकी एक आँख कमजोर थी। उसकी इस कमजोरी के कारण गाँव के बच्चे उसे चिढ़ाते थे और "काना" कहकर बुलाते थे। नंदिनी यह सब सहती, लेकिन भीतर ही भीतर उसे बहुत दुःख होता। उसके पिता एक गरीब किसान थे। माँ घर संभालती थी, और नंदिनी अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। परिवार के पास ज्यादा साधन नहीं थे, लेकिन नंदिनी के दिल में एक बड़ा सपना था। वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना चाहती थी ताकि वह उन बच्चों की मदद कर सके, जिन्हें उसकी तरह कमजोरी या बीमारी के कारण ताने सहने पड़ते हैं। चुनौतियों का सामना नंदिनी का स्कूल गाँव के पास ही था। स्कूल में पढ़ाई का स्तर बहुत साधारण था, और गाँव के बच्चे पढ़ाई से ज्यादा खेल-कूद में रुचि रखते थे। लेकिन नंदिनी अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर थी। उसे पता था कि डॉक्टर बनने के लिए मेहनत करनी होगी। हर दिन स्कूल से लौटने के बाद, वह अपने पिता के खेत में काम में हाथ बंटाती। माँ से खाना बनाना सीखती, और रात को दीये की हल्की रोशनी में किताबें पढ़ती। कई बार वह ...