अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ें,
never give up on your dreams
भीम का सपना था कि वह जंगल के सबसे अच्छे धावक बने। जंगल में बहुत सारे जानवर थे, जो दौड़ने में बहुत तेज थे। वहाँ एक तेंदुआ था, जिसका नाम शेरू था, जो जंगल के सबसे तेज धावक के रूप में प्रसिद्ध था। शेरू के बारे में सभी जानवर कहते थे कि उसकी गति और शक्ति का कोई मुकाबला नहीं कर सकता। लेकिन भीम का सपना था कि वह शेरू को एक दिन हराएगा। उसका दिल कहता था, "अगर शेरू जीत सकता है, तो मैं भी क्यों नहीं?"
लेकिन बाकी जानवर भीम का मजाक उड़ाते थे। "तुम तो हाथी हो, दौड़ में कैसे जीत सकते हो?" गीदड़ ने कहा। "तुमारे पास तो इतनी भारी देह है, तुम क्या शेरू को हराओगे?" बंदर ने हंसते हुए कहा। भीम को इन बातों से दुख जरूर होता, लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी। उसने ठान लिया कि वह शेरू से दौड़ में जरूर जीतकर दिखाएगा।
भीम ने अपनी तैयारी शुरू कर दी। वह हर दिन जंगल के अंदर दौड़ने की कोशिश करता, चाहे वह थक जाता या उसकी गति उतनी तेज नहीं होती। उसे लगातार अपनी सीमा बढ़ानी थी। हर सुबह सूर्योदय से पहले, वह घने जंगल में दौड़ने निकल जाता। शुरुआत में वह बहुत थक जाता, लेकिन फिर भी वह रुका नहीं। उसने सोचा, "हर दिन थोड़ा और प्रयास करूंगा, और एक दिन मैं शेरू को जरूर हराऊँगा।"
वहीं, शेरू की तावीज़ी में रोटी और आराम से जीने की आदत थी। वह समझता था कि उसकी तेज़ी से कोई मुकाबला नहीं कर सकता। उसे अपनी गति और शक्ति पर इतना घमंड था कि वह भीम की कठिनाइयों को देखकर हंसता। "तुम कोशिश करो भीम, लेकिन मैं तो जंगल का सबसे तेज़ दौड़ने वाला हूं। तुम मुझे कभी नहीं हरा पाओगे," शेरू ने कहा और जोर से हंसते हुए जंगल में भाग गया।
लेकिन भीम ने यह सब दिल से सुना और एक ठान लिया कि वह कभी हार नहीं मानेगा। उसने दिन-रात अभ्यास किया और धीरे-धीरे उसकी गति बढ़ने लगी। कुछ समय बाद, एक दिन जंगल में एक बड़ा दौड़ प्रतियोगिता हुआ, और सभी जानवरों ने भाग लिया। शेरू, जो पहले से ही अपनी जीत को लेकर बहुत आश्वस्त था, और भीम दोनों ने इसमें भाग लिया।
शुरुआत में, शेरू ने बहुत तेजी से दौड़ना शुरू किया और भीम पीछे रह गया। जंगल के सारे जानवर चिल्ला रहे थे, "शेरू जीतने वाला है! वह सबसे तेज़ है!" लेकिन भीम ने हार मानने की बजाय अपना प्रयास जारी रखा। उसने खुद से कहा, "अगर मुझे कभी सफलता चाहिए, तो मुझे खुद पर विश्वास करना होगा।"
भीम ने लगातार अपनी दौड़ जारी रखी। शेरू ने अपने घमंड में कुछ देर के लिए रुक कर देखा और यह सोचने लगा, "भीम कितना कोशिश कर रहा है! लेकिन मैं उसे कभी नहीं हरा सकता।" इसी बीच शेरू को थोड़ी थकान महसूस होने लगी, क्योंकि उसने पूरे रास्ते में ज्यादा मेहनत की थी, और अब उसका शरीर थकने लगा था।
भीम ने धीरे-धीरे अपनी गति को और तेज किया और शेरू से करीब पहुँचा। अब वह शेरू के सामने था और एक आखिरी स्पीड में दौड़ने के लिए तैयार था। शेरू ने अपनी पूरी ताकत लगाई, लेकिन भीम ने पूरी मेहनत के साथ अपनी दौड़ जारी रखी। और आखिरकार, आखिरी मोड़ पर भीम ने शेरू को हरा दिया।
सभी जानवरों ने देखा और चुपचाप खड़े हो गए। भीम ने अपना लक्ष्य हासिल किया। जंगल में हर जगह उसकी जीत की चर्चा होने लगी। "भीम ने शेरू को हरा दिया!" सभी जानवर खुशी से चिल्लाए। शेरू भी हैरान रह गया और उसने भीम से कहा, "तुमने साबित कर दिया कि कभी हार नहीं माननी चाहिए।"
भीम ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "मैंने हार मानने का नाम नहीं लिया। अगर मैं आज शेरू को हरा पाया, तो इसका मतलब यह है कि किसी भी सपने को हासिल करने के लिए हमें अपनी पूरी मेहनत लगानी चाहिए।"
नैतिक शिक्षा:
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में हमारे सामने कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, हमें अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। भीम ने यह साबित किया कि किसी के आकार, वजन या स्थिति से फर्क नहीं पड़ता। अगर हमारी मेहनत और आत्मविश्वास मजबूत हो, तो हम किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं। हमें खुद पर विश्वास रखना चाहिए और लगातार मेहनत करते रहना चाहिए, क्योंकि सफलता कभी हार मानने वालों को नहीं मिलती। "अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ें" यही असली संदेश है।
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