राजकुमार और जादुई झील
बहुत समय पहले की बात है, एक राज्य था जिसका नाम सुरमाल था। वहाँ का राजा, राजा वीरेंद्र, अपने प्रजाजनों के लिए बहुत प्रिय था। राजा के तीन बेटे थे—राजकुमार आदित्य, राजकुमार आर्यन, और सबसे छोटा, राजकुमार ईशान।
राजा वीरेंद्र हमेशा अपने बेटों को सिखाते थे कि सच्चा राजा वही होता है, जो अपने प्रजा की भलाई के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर कर दे। एक दिन राजा ने अपने तीनों बेटों को बुलाया और कहा, “हमारे राज्य में जल संकट बढ़ रहा है। नदी और तालाब सूख रहे हैं। हमें इस समस्या का समाधान खोजना होगा। जो राजकुमार इस समस्या का समाधान करेगा, वही अगला राजा बनेगा।”
राजकुमारों ने इस चुनौती को स्वीकार किया और अगले दिन यात्रा पर निकल पड़े।
पहली बाधा
सबसे बड़े राजकुमार आदित्य ने सोचा, "मुझे सबसे शक्तिशाली तरीके से इस समस्या का समाधान खोजना होगा।" वह तलवार लेकर एक विशाल पहाड़ की ओर चल पड़ा। पहाड़ के ऊपर एक जादुई साधु रहता था। साधु ने आदित्य से पूछा, “राजकुमार, यहाँ क्यों आए हो?”
आदित्य ने उत्तर दिया, “मुझे जादुई शक्ति चाहिए ताकि मैं अपने राज्य की मदद कर सकूं।”
साधु ने कहा, “शक्ति पाने के लिए तुम्हें अपनी सबसे प्रिय वस्तु का त्याग करना होगा।” लेकिन आदित्य अपनी तलवार को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। निराश होकर, वह वापस लौट गया।
दूसरी बाधा
दूसरे राजकुमार आर्यन ने सोचा, “समस्या का हल चतुराई से निकाला जा सकता है।” वह एक दूरस्थ गाँव में पहुँचा, जहाँ उसने एक बुजुर्ग महिला को देखा। महिला ने उससे पूछा, “राजकुमार, क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो? मेरी झोपड़ी टूट गई है।”
आर्यन ने सोचा कि उसका समय बर्बाद होगा, और उसने कहा, “मुझे जादुई झील की खोज करनी है, मैं मदद नहीं कर सकता।” महिला मुस्कुराई और कहा, “जो दूसरों की मदद नहीं करता, उसे जादुई झील का रास्ता कभी नहीं मिलेगा।” आर्यन निराश होकर वापस चला गया।
सबसे छोटा राजकुमार
तीसरा राजकुमार, ईशान, सबसे विनम्र और दयालु था। उसने सोचा कि वह लोगों की कहानियाँ सुनेगा और उनके दुखों को समझेगा। यात्रा के दौरान, वह एक गाँव पहुँचा जहाँ लोग प्यास से बेहाल थे। ईशान ने अपना पानी उन्हें दे दिया और उनकी मदद की।
उसी गाँव में एक बूढ़ी महिला ने ईशान से कहा, “तुम्हारी दया ने मेरा दिल जीत लिया। जादुई झील का रास्ता मैं तुम्हें दिखा सकती हूँ। लेकिन वहाँ तक पहुँचने के लिए तुम्हें तीन परीक्षाओं से गुजरना होगा।”
जादुई परीक्षाएँ
ईशान को सबसे पहले एक गुफा से गुजरना था, जहाँ गहरी अंधकार था। उसने अपने साहस के बल पर इसे पार कर लिया। दूसरी परीक्षा में उसे एक बगीचे में बहुत सारे लाल और नीले फूल मिले। बूढ़ी महिला ने कहा था कि केवल सच्चाई का फूल तोड़ना होगा। ईशान ने अपनी बुद्धिमत्ता से सच्चाई का फूल पहचाना।
आखिरी परीक्षा में उसे एक राक्षस से सामना करना पड़ा, जिसने कहा, “अगर तुम मेरी पहेली का सही उत्तर दोगे, तो मैं तुम्हें झील तक जाने दूँगा।” राक्षस ने पूछा, “ऐसी कौन सी चीज़ है जो हर किसी के पास है, लेकिन कोई देख नहीं सकता?”
ईशान ने उत्तर दिया, “परछाई।” राक्षस मुस्कुराया और उसे झील का रास्ता दिखा दिया।
झील की शक्ति
जादुई झील चमकदार थी। ईशान ने झील से प्रार्थना की और झील ने उसे एक घड़ा भर पानी दिया। वह पानी ऐसा था कि जहाँ भी डाला जाता, वहीं पानी का स्रोत बन जाता।
ईशान झील के पानी को लेकर अपने राज्य वापस लौटा। उसने उस पानी को राज्य के सूखे तालाबों और नदियों में डाला। कुछ ही दिनों में राज्य में पानी की समस्या खत्म हो गई।
राजा वीरेंद्र ने ईशान की बुद्धिमानी, साहस, और दया देखकर उसे राज्य का अगला राजा बना दिया। ईशान ने अपने शासन में हमेशा प्रजा का भला सोचा और अपने राज्य को समृद्ध बनाया।
सीख:
यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा राजा वही होता है जो निःस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करता है और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और बुद्धिमानी से काम लेता है।

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