मेहनत का फल
एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके पास बहुत ही कम जमीन थी और वह दिन-रात मेहनत करता था ताकि अपने परिवार का पेट भर सके। रामू के पास एक पुराना बैल था, जिसे वह बहुत प्यार करता था। वह बैल उसकी खेती का मुख्य साधन था।
संघर्ष का आरंभ :
एक साल गाँव में भयंकर सूखा पड़ा। फसलें सूख गईं और किसान परेशान हो गए। रामू की स्थिति और भी खराब हो गई। उसका बैल भी बीमार पड़ गया। रामू ने अपनी सारी जमा पूंजी बैल के इलाज में लगा दी, लेकिन बैल ठीक नहीं हो सका और एक दिन वह मर गया।
रामू बहुत दुखी हुआ लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने अपने बची हुई जमीन पर खुद ही मेहनत करने का फैसला किया। वह सुबह से शाम तक खेत में काम करता और खुद ही फसल बोता और काटता।
मेहनत का फल :
रामू की मेहनत रंग लाई और उसकी फसल धीरे-धीरे बढ़ने लगी। उसने अपने खेत में नये तरीके अपनाए और मेहनत से काम किया। कुछ सालों बाद उसकी फसल इतनी अच्छी हो गई कि वह अपने परिवार के साथ सुखी जीवन जीने लगा। गाँव के लोग रामू की मेहनत और लगन की मिसाल देने लगे।
नैतिक शिक्षा :
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है। कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं माननी चाहिए और निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। सफलता उन्हीं को मिलती है जो सच्चे दिल से मेहनत करते हैं।
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