Skip to main content

Posts

सफलता का रहस्य - "सुकरात" (Motivational Story in hindi )

सफलता का रहस्य - "सुकरात" एक बार एक व्यक्ति ने महान Philosopher सुकरात से पूछा कि “सफलता का रहस्य क्या है?” – What is the secret of success? सुकरात ने उस इंसान को कहा कि वह कल सुबह नदी के पास मिले, वही पर उसे अपने प्रश्न का जवाब मिलेगा। जब दूसरे दिन सुबह वह व्यक्ति नदी के पास मिला तो सुकरात ने उसको नदी में उतरकर, नदी गहराई की गहराई मापने के लिए कहा।

farmer's determination किसान का दृढ़ निश्चय (Motivational Story in hindi )

  किसान का दृढ़ निश्चय एक चिड़िया ने अपने बच्चों के साथ जा खेत में एक बहुत ही सुंदर घोसला बनाया हुआ था। जब खेत में फसल अच्छी तरह से पक गई। तब किसान उस खेत पर गया और बोला” कल पड़ोसियों को बुलाकर फसल काटने के लिए कहूंगा” चिड़िया के बच्चों ने सुना तो पूरी तरह से डर गए और सहम गए। चिड़िया बोली,”बिल्कुल भी घबराओ मत” हम पूरी तरह से सुरक्षित है, किसान कल फसल काटने नहीं आएगा। अगले दिन किसान पड़ोसियों के ना पहुंचने पर यह कहते हुए चला गया की अगले दिन मैं अपने रिश्तेदारों को लेकर आऊंगा फसल काटने। चिड़िया के बच्चे पूरी तरह से डर गए।

Motivational Short Story In Hindi : एक व्यक्ति कभी नहीं हार सकता

Motivational Short Story In Hindi: एक  व्यक्ति कभी नहीं हार सकता Short Inspirational Story In Hindi  बहुत पुरानी बात है एक जंगल में एक गुरुकुल था जिसमे बहुत सारे बच्चे पढ़ने आते थे एक बात की बात है गुरु जी सभी विद्यार्थीओ को पढ़ा रहे थे मगर एक विद्यार्थी ऐसा था जिसे बार-बार समझाने पर भी समझ में नहीं आ रहा था। गुरु जी को बहुत तेज़ से गुस्सा आया और उन्होंने उस विद्यार्थी से कहा जरा अपनी हथेली तो दिखाओ बेटा। विद्यार्थी ने हथेली गुरु जी के आगे कर दी हथेली देखकर गुरु जी बोले बेटा तुम घर चले जाओ आश्रम में रहकर अपना समय व्यर्थ मत करो तुम्हारे भाग्य में विद्या नहीं है। शिष्य ने पूछा क्यों गुरु जी? गुरु जी ने कहा तुम्हारे हाथ में विद्या की रेखा नहीं है। गुरु जी ने एक हुसियार विद्यार्थी की हथेली उसे दिखाते हुए कहा यह देखो ये है विद्या की रेखा यह तुम्हारे हाथ में नहीं है इसलिए तुम समय नस्ट ना करो और घर चले जाओ और वहा अपना कोई और काम देखो।

"दुखी मोर की कहानी"

"दुखी मोर की कहा  नी" एक समय की बात है, एक अच्छे और खुशमिजाज मोर जंगल में रहता था। वह हमेशा अपनी खूबसूरत तालियों को फैलाता और अपने रंगीन पंखों को खुद पर गर्व   महसूस करता था। वह अपनी आवाज़ से सभी को हर्षित कर देता और सबके दिलों को आनंदित करता था।  

क्रोध और नियंत्रण

  एक समय की बात है। एक राजा घने जंगल में भटक गया। कई घंटों के बाद वह प्यास से व्याकुल होने लगा। तभी उसकी नजर एक वृक्ष पर पड़ी जहां एक डाली से टप-टप करती पानी की छोटी-छोटी बूंदें गिर रही थीं। राजा ने पत्तों का दोना बनाकर पानी इकट्ठा किया, राजा जैसे ही पानी पीने लगा एक तोता आया और झपट्टा मार दोने को गिरा दिया। राजा ने सोचा पंछी को प्यास लगी होगी इसलिए वह भी पानी पीना चाहता था लेकिन गलती से उसने झपट्टा मारकर पानी को गिरा दिया। यह सोचकर राजा फिर से खाली दोने को भरने लगा, काफी देर के बाद वह दोना फिर भर गया। राजा ने हर्षचित्त होकर जैसे ही दोने को उठाया तो तोते ने वापस उसे गिरा दिया। राजा को बहुत तेज गुस्सा आया और उसने चाबुक उठाकर तोते पर वार किया और उसके प्राण निकल गए।

मंदबुद्धि बालक

  विद्यालय में सब उसे मंदबुद्धि कहते थे। उसके गुरुजन भी उससे नाराज रहते थे क्योंकि वह पढ़ने में बहुत कमजोर था और उसकी बुद्धि का स्तर औसत से भी कम था। कक्षा में उसका प्रदर्शन हमेशा ही खराब रहता था। और बच्चे उसका मजाक उड़ाने से कभी नहीं चूकते थे। पढने जाना तो मानो एक सजा के समान हो गया था, वह जैसे ही कक्षा में घुसता और बच्चे उस पर हंसने लगते, कोई उसे महामूर्ख तो कोई उसे बैलों का राजा कहता, यहाँ तक की कुछ अध्यापक भी उसका मजाक उड़ाने से बाज नहीं आते। इन सबसे परेशान होकर उसने स्कूल जाना ही छोड़ दिया।अब वह दिन भर इधर-उधर भटकता और अपना समय बर्बाद करता। एक दिन इसी तरह कहीं से जा रहा था , घूमते-घूमते उसे प्यास लग गयी। वह इधर-उधर पानी खोजने लगा। अंत में उसे एक कुआं दिखाई दिया। वह वहां गया और कुएं से पानी खींच कर अपनी प्यास बुझाई। अब वह काफी थक चुका था, इसलिए पानी पीने के बाद वहीं बैठ गया।

गुरु की शिक्षा

 गुरु की शिक्षा  गुरु रामस्वरूप अपने शिष्यों के साथ आश्रम के लिए भिक्षाटन पर निकले थे। वह अपने गुरुकुल में भोजन की व्यवस्था भिक्षा मांग कर ही किया करते थे।जब वह एक कस्बे से दूसरे कस्बे की ओर जा रहे थे, रास्ते में खेत-बधार मिलने लगे। किसी खेत में हरी-भरी फसल खड़ी तो कोई खेत बंजर नजर आ रहा था। ऐसे ही एक बंजर खेत पर किसान कुछ बुवाई करने के लिए खेत को जोत रहा था। वहीं पेड़ के नीचे उसने अपना सारा सामान, पोटली आदि रखा हुआ था। गुरु रामस्वरूप के शिष्यों में एक शिष्य शरारती था, वह शरारती स्वभाव के कारण किसान की रखी हुई पोटली उठा लाया।गुरु रामस्वरूप को जब ज्ञात हुआ कि उसके शिष्य ने कुछ शरारत किया है। गुरु ने शिष्य को समझाया –  ‘पुत्र इस प्रकार तुम उस गरीब किसान की पोटली चुरा कर उसे कष्ट दे रहे हो! यह कार्य तुम्हें शोभा नहीं देता। तुम उस किसान को दुखी करके अपने ईश्वर को दुखी करोगे। तुम्हें जो पैसे भिक्षा में मिले हैं उसे ले जाकर उसी स्थान पर पोटली सहित रख दो और फिर किसान का भाव देखो।’ शिष्य ने ऐसा ही किया -वह पोटली और पोटली के नीचे भिक्षा में मिले हुए पैसे रख आता है। गरीब किसान काफी...